Posts

Showing posts with the label Abid Rauf Qadri
ADVERTISEMENT

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह / Nahin Hai Koi Duniya Mein Hamara Ya Rasoolallah

नहीं है कोई दुनिया में हमारा, या रसूलल्लाह ! हमें तो आप ही का है सहारा, या रसूलल्लाह ! सरापा मा'सियत हूँ, बार है बेहद गुनाहों का बचाना नार-ए-दोज़ख़ से ख़ुदा-रा, या रसूलल्लाह ! हूँ सर से पाँव तक डूबा हुवा ग़म के समुंदर में नहीं आता नज़र कोई किनारा, या रसूलल्लाह ! तलातुम-ख़ेज़ है दरिया, भँवर में है मेरी कश्ती नज़र आता नहीं कोई किनारा, या रसूलल्लाह ! तड़पता है मेरा दिल और तरसती हैं बहुत आँखें बुला लो अब मदीने में दोबारा, या रसूलल्लाह ! तड़पता है ये दिल मेरा, तरसती हैं मेरी आँखें बुला लो अब मदीने में दोबारा, या रसूलल्लाह ! ख़ुदा जब आप से फ़रमाए, लाओ अपनी उम्मत को हमारी सिम्त भी करना इशारा, या रसूलल्लाह ! फ़क़त आ'माल के बदले न पाएगा कोई जन्नत न होगा आप का जब तक इशारा, या रसूलल्लाह ! ब-रोज़-ए-हश्र मेरे इस यक़ीं की लाज रख लेना तुम्हारा हूँ, तुम्हारा हूँ, तुम्हारा, या रसूलल्लाह ! हक़ीक़त में बहुत बढ़ कर के है 'अर्श-ए-मु'अल्ला से ज़मीं जिस पर हो नक़्श-ए-पा तुम्हारा, या रसूलल्लाह ! दम-ए-आख़िर ज़रा मुश्ताक़ पर इतना करम करना कि इस के लब पे हो कलमा तुम्हारा, या रसूलल्लाह ! ना'त...

ख़ुदा का दीन बचाना हुसैन जानते हैं / Khuda Ka Deen Bachaana Husain Jaante Hain

ख़ुदा का दीन बचाना हुसैन जानते हैं सर-ए-नियाज़ कटाना हुसैन जानते हैं बता रही है हमें ये ज़मीन-ए-कर्ब-ओ-बला यज़ीदियत को मिटाना हुसैन जानते हैं जहाँ में छाए हुए हैं अँधेरे बातिल के चराग़-ए-दीन जलाना हुसैन जानते हैं ग़म-ए-हुसैन में आँखों से अश्क जारी हैं है कौन उन का दीवाना हुसैन जानते हैं मदीना पाक की गलियों में दोश-ए-अक़्दस पर उठा के चलते थे नाना हुसैन जानते हैं ये बात सच है कि, सय्यद ! हिसाब मुश्किल है हमें है कैसे छुड़ाना हुसैन जानते हैं शायर: सय्यिद इम्तियाज़ हुसैन काज़मी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद ज़बीब मसूद आबिद रऊफ़ क़ादरी ----------------------------------------------- ख़ुदा का दीन बचाना हुसैन जानते हैं यज़ीदियों को मिटाना हुसैन जानते हैं ख़ुदा का दीन बचाना हुसैन जानते हैं नबी से वा'दा निभाना हुसैन जानते हैं कटे हुए सर-ए-अक़्दस से नोक-ए-नेज़ा पर क़ुरआन-ए-पाक सुनाना हुसैन जानते हैं वो जानते हैं कि मुन्किर है कौन पंज-तन का है कौन उन का दीवाना हुसैन जानते हैं क़सम ख़ुदा की ! वो नस्ल-ए-यज़ीद में होगा जो आज भी नहीं माना हुसैन जानते हैं हुआ जो कर्ब-ओ-बला में रिज़ा-ए-हक़ थी रिज़ा ...