नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह / Nahin Hai Koi Duniya Mein Hamara Ya Rasoolallah
नहीं है कोई दुनिया में हमारा, या रसूलल्लाह ! हमें तो आप ही का है सहारा, या रसूलल्लाह ! सरापा मा'सियत हूँ, बार है बेहद गुनाहों का बचाना नार-ए-दोज़ख़ से ख़ुदा-रा, या रसूलल्लाह ! हूँ सर से पाँव तक डूबा हुवा ग़म के समुंदर में नहीं आता नज़र कोई किनारा, या रसूलल्लाह ! तलातुम-ख़ेज़ है दरिया, भँवर में है मेरी कश्ती नज़र आता नहीं कोई किनारा, या रसूलल्लाह ! तड़पता है मेरा दिल और तरसती हैं बहुत आँखें बुला लो अब मदीने में दोबारा, या रसूलल्लाह ! तड़पता है ये दिल मेरा, तरसती हैं मेरी आँखें बुला लो अब मदीने में दोबारा, या रसूलल्लाह ! ख़ुदा जब आप से फ़रमाए, लाओ अपनी उम्मत को हमारी सिम्त भी करना इशारा, या रसूलल्लाह ! फ़क़त आ'माल के बदले न पाएगा कोई जन्नत न होगा आप का जब तक इशारा, या रसूलल्लाह ! ब-रोज़-ए-हश्र मेरे इस यक़ीं की लाज रख लेना तुम्हारा हूँ, तुम्हारा हूँ, तुम्हारा, या रसूलल्लाह ! हक़ीक़त में बहुत बढ़ कर के है 'अर्श-ए-मु'अल्ला से ज़मीं जिस पर हो नक़्श-ए-पा तुम्हारा, या रसूलल्लाह ! दम-ए-आख़िर ज़रा मुश्ताक़ पर इतना करम करना कि इस के लब पे हो कलमा तुम्हारा, या रसूलल्लाह ! ना'त...